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Governance

बिहार के वोटर्स के सिर पर मंडराता एसआईआर का खतरा

बिहार विधान सभा के इस साल के अंत में होने वाले चुनाव से लगभग चार माह पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के निर्वाचन आयोग के आदेश ने लोकतंत्र के प्रहरियों को हैरत में डाल दिया। मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करने की एसआईआर की शर्तों ने बिहार के साथ-साथ देश की बहुत […]

राज्यपालों को एक निश्चित समयसीमा के अंदर विधेयकों पर लेना होगा फैसला 

विधेयकों को मंजूरी नहीं देने या उन्हें लम्बे समय तक लटकाए रखने के कई राज्यों के राज्यपालों की प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला दिया। तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि के खिलाफ दायर राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों का जवाब दिया। सुप्रीम […]

Human Rights & Law

बुलडोजर से अन्याय

आपराधिक मामलों के अभियुक्तों के मकान पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई ने देश के कानून के सामने नई चुनौती पेश की है। कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी की छत को कैसे ढहाया जा सकता है? अभियुक्त तो दूर यदि किसी को मुकदमे के बाद दोषी भी पाया गया है, तो क्या उसके मकान […]

Human Rights & Law

अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान का दर्जा तय करने के लिए मापदंडों को उदार किया सुप्रीम कोर्ट ने 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर लम्बे समय से चली आ रही कानूनी जंग अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:3 के बहुमत से साफतौर पर कहा कि संसद द्वारा पारित कानून का मतलब यह नहीं है कि उस शिक्षण संस्थान अपने अल्पसंख्यक […]

चर्चित रहा जस्टिस धनंजय चंद्रचूड का कार्यकाल

भारत के चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड का दो वर्ष का कार्यकाल सुर्खियों में रहा। वैसे तो वह आठ साल से अधिक समय तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे लेकिन सीजेआई के रूप में उनके दो वर्ष लगातार चर्चा में रहे। सीजेआई बनने से पहले ही जस्टिस चंद्रचूड ने कई ऐसे […]

Human Rights & Law

एक देश, एक चुनाव: क्रियान्वयन आसान नहीं होगा 

 देश में लोक सभा और विधान सभा के चुनाव एकसाथ कराने के प्रस्ताव को केन्द्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। केन्द्र सरकार ने कहा है कि संसद शीतकालीन सत्र में विधेयक लाएगी। एक राष्ट्र, एक चुनाव का नारा जितना आकर्षक लगता है, इसे लागू करना उतना ही मुश्किल है। सभी 28 राज्यों और कुछ […]

Human Rights & Law

सीआरपीसी के तहत मुस्लिम महिलाएं भी भरण-पोषण की हकदार 

विवेक वार्ष्णेय सुप्रीम कोर्ट के मुस्लिम महिलाओं की गरिमा और समाज में उन्हें बराबरी का दर्जा का देने के लिए एक अहम फैसला दिया है। सीआरपीसी की धारा 125 के तहत मुस्लिम महिलाएं भी गुजारा-भत्ता पाने की हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिलाओं के लिए 1986 में लाया गया कानून उन्हें […]

Human Rights & Law

गिरफ्तारी का आधार बताना लाजमी हो गया है पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए

सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने भारत के आपराधिक न्यायशास्त्र की तस्वीर बदल दी है। प्रबीर पुरकायस्थ बनाम दिल्ली सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने गिरफ्तारी का आधार बताना लाजमी कर दिया है। किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस या जांच एजेंसी को यह लिखित रूप से बताना होगा […]

Governance
Human Rights & Law

चुनावी चंदे का ब्यौरा जानने का हक है मतदाता को

चुनावी चंदा या इलैक्ट्रोरल बांड पर दिया गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला राजनीतिक दलों और औद्योगिक घरानों के बीच के गठजोड़ से पर्दा उठाने का एक साहसिक प्रयास है। चंदा एकत्र करने में पारदर्शिता के अभाव के चलते सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने छह साल पुरानी चुनावी चंदे की योजना को असंवैधानिक करार दिया। […]

Human Rights & Law

उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता के जरिए लिव-इन रिश्तों पर पहरेदारी 

उत्तराखंड विधान सभा द्वारा पारित समान नागरिक संहिता विधेयक विवाह, तलाक, लिव-इन, उत्तराधिकार और बच्चों को गोद लेने के कानून में एकरूपता लाने का प्रयास है ताकि इसे सभी धर्मों के लोगों पर समान रूप से लागू किया जा सके। संविधान के अनुच्छेद 44 में पूरे देश में समान नागरिक संहिता की बात कही गई […]

Human Rights & Law

आजीवन कारावास की सजा भुगतने वाले कैदियों की समयपूर्व रिहाई के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट का प्रहार

लम्बे समय से जेल की सलाखों में कैद अपराधियों को समाज की मुख्य धारा में वापस लाने के लिए सजा में छूट(रेमीशन) दी जाती है। जेल से बाहर आकर वह सामान्य जीवन गुजार सके, इसके लिए देश के अलग-अलग राज्यों ने अपनी-अपनी गाइडलाइंस बनाई हैं। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के दंगों से संबंधित […]

Human Rights & Law

नए फौजदारी कानूनों को लागू करने में कई चुनौतियां

नए फौजदारी कानूनों को लागू करने में कई चुनौतियां केन्द्र सरकार ने फौजदारी कानूनों में बदलाव करने का साहसिक कदम उठाया है। भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता 2023 तथा भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) अधिनियम 2023 संसद से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी हासिल कर चुके हैं। यह तीनों कानून […]

Human Rights & Law

विधेयकों पर चुप्पी नहीं साध सकते राज्यपाल

राज्य की विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के अधिकारों पर अहम फैसला दिया है। राज्यपाल लम्बे समय तक विधेयकों को पेंडिंग नहीं रख सकते। संघीय ढांचे में राज्यपाल के अधिकार बहुत सीमित हैं। राज्यपाल उन्हीं विषयों पर अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं जहां उन्हें […]

Human Rights & Law

निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए विधेयक में नए प्रावधान

एक कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयुक्तों को नियुक्त करने का विधेयक संसद में पेश तो कर दिया गया है लेकिन इस पर अभी चर्चा नहीं हो पाई है। संसद में चर्चा होने से पहले ही यह विधेयक सुर्खियों में आ गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन आयोग का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। […]